सबसे ख़तरनाक
पडघम - साहित्यिक
पाश
  • पाश आणि त्याची खतरनाक कविता
  • Sat , 30 September 2017
  • पडघम साहित्यिक पाश Pash अवतारसिंग संधू Avtar Singh Sandhu सबसे ख़तरनाक Sabse Khatarnaak The Most Dangerous Thing

अवतारसिंग संधू उर्फ पाश या कवीची ‘सबसे ख़तरनाक’ ही कविता हिंदी भाषेच्या अभ्यासक्रमातून काढून टाकावी यासाठी दीनानाथ बात्रा यांनी प्रयत्न सुरू केले आहेत. सध्याचा काळच मोठा कठीण आहे. त्यामुळे ही कविता अभ्यासक्रमातून काढून टाकली जाऊ शकते. तिच्या वाचनावर बंदीही येऊ शकते. त्यामुळे ती आताच वाचून घेतलेली बरी.

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मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती

पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती

गद्दारी-लोभ की मुठ्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती

बैठे-बिठाए पकडे़ जाना-बुरा तो है

सहमी-सी चुप में जकडे़ जाना-बुरा तो है

पर सबसे ख़तरनाक नहीं होता

कपट के शोर में

सही होते हुए भी दब जाना-बुरा तो है

किसी जुगनू की लौ में पढ़ना-बुरा तो है

मुठ्ठियाँ भींचकर बस वक़्त निकाल लेना-बुरा तो है

सबसे ख़तरनाक नहीं होता

सबसे ख़तरनाक होता है

मुर्दा शांति से भर जाना

न होना तड़प का सब सहन कर जाना

घर से निकलना काम पर

और काम से लौटकर घर जाना

सबसे ख़तरनाक होता है

हमारे सपनों का मर जाना

सबसे ख़तरनाक वह घड़ी होती है

आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो

आपकी निगाह में रुकी होती है

सबसे ख़तरनाक वह आँख होती है

जो सबकुछ देखती हुई भी जमी बर्फ़ होती है

जिसकी नज़र दुनिया को मुहब्बत से चूमना भूल जाती है

जो चीज़ों से उठती अंधेपन की भाप पर ढुलक जाती है

जो रोज़मर्रा के क्रम को पीती हुई

एक लक्ष्यहीन दुहराव के उलटफेर में खो जाती है

सबसे ख़तरनाक वह चाँद होता है

जो हर हत्याकांड के बाद

वीरान हुए आँगनों में चढ़ता है

पर आपकी आँखों को मिर्चों की तरह नहीं गड़ता है

सबसे ख़तरनाक वह गीत होता है

आपके कानों तक पहुँचने के लिए

जो मरसिए पढ़ता है

आतंकित लोगों के दरवाज़ों पर

जो गुंडे की तरह अकड़ता है

सबसे ख़तरनाक वह रात होती है

जो जिंदा रूह के आसमानों पर ढलती है

जिसमें सिर्फ़ उल्लू बोलते और हुआँ हुआँ करते गीदड़

हमेशा के अँधेरे बंद दरवाज़ों-चौगाठों पर चिपक जाते हैं

सबसे ख़तरनाक वह दिशा होती है

जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाए

और उसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा

आपके जिस्म के पूरब में चुभ जाए

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती

पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती

गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती।

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हीच कविता व्हीडिओ स्वरूपात ऐका, पहा.

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पाशच्या काही कवितांचा मराठीमध्ये पुस्तकरूपाने अनुवाद झाला आहे.

पाशच्या निवडक कविता​ - अनुवाद निरंजन उजगरे​,

लोकवाङमय गृह​, मुंबई, पाने - ११३, मूल्य - १०० रुपये.​

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Shridhar Chaitanya

Sun , 15 October 2017

लवकरच प्रसिद्ध होत आहेत पाशच्या आणखि कविता =हरिती प्रकाशन